हरेन पंड्या हत्या मामला; राणा आयूब की पुस्तिका कल्पनाविलास और तथ्यहीन : सुप्रीम कोर्ट


गुजरात मे पूर्व गृहमंत्री हरेन पंड्या की मृत्य का मामला कुछ वर्षों पहले सामने आया था। जिसमे कुल 12 गिरफ़्तरोंको दोषी करार दिया गया हैं। हरेन पंड्या की हत्या में नरेंद्र मोदी और अमित शाह दोषी हैं, ऐसा अजेंडा मीडिया की मदद से कांग्रेस ने चलाया था। उस प्रोपगंडा के तहत कई साक्षात्कार, स्टोरीज, बातें समाचार पत्रों में छपकर आयी थी।

इन सभी प्रोपगंडा की संहिता में राणा आयूब इस महिला पत्रकार ने ‘गुजरात फाइल्स’ नामक किताब लिखी थी। जिस किताब में सीधी तौर पे नरेंद्र मोदी तथा अमित शाह को दोषी बताया गया है। राणा अयूब के मुताबिक, हरेन पंड्या राजनीतिक प्रतियोगी थे और इसीके कारण नरेंद्र मोदी और अमित शाह ने उनके हत्या की साजिश की। वस्तुतः हरेन पंड्या के हत्या का मामला उन कई मामलों से एक है, जिनके चलते हुए , नरेंद्र मोदी और अमित शाह को अवास्तव परेशान किया गया।

हरेन पंड्या हत्या के मामले में 12 अपराधियों के शिक्षा को उच्चतम न्यायालय ने वैध करार दिया हैं। तथा इस पूरे मामले में पुनः जाँच की मांग को खारिज कर दिया गया है।’ सेंटर फॉर पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन’, इस प्रशान्त भूषण की संस्था ने हरेन पंड्या हत्या के मामले में फिर से जांच हो , ऐसी मांग रखी थीं। हालांकि उच्चतम न्यायालय ने पचास हजार रुपए का दण्ड लगाकर, प्रशांत भूषण की याचिका खारिज कर दी हैं।

उच्चतम न्यायालय ने कहा हैं कि, ” राणा आयुब की किताब निरुपयोगी हैं, तथा उसमें लिखी गयी बातें कल्पनाविलास और केवल तर्क के आधार पर लिखी हैं। राणा आयूब के किताब को कोई तथ्य का आधार नहीं। पुनःसमीक्षा का आधार ऐसी किताब नहीं हो सकती।

५ जुलाई २०१९ को इस मामलें में प्रलंबित सभी याचिकाओं पर सुनवाई हुई। हरेन पंड्या मामला अभी उच्चतम न्यायालय द्वारा अन्तिमतः निर्णीत हो गया है। सभी याचिकाएं खारिज कर दी गयी हैं।

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